पंचायत भवन में शराब पीते सरपंच पति का वीडियो वायरल, ‘SYSTEM’ पर उठे सवाल, देखें वीडियो…

{Pankaj Kurre}

जांजगीर-चांपा | नवागढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोटिया में पंचायत भवन के अंदर एक व्यक्ति के कथित तौर पर शराब पीने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पंचायत व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति शासकीय कामकाज के लिए इस्तेमाल होने वाली टेबल पर पैर रखकर शराब पीता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति को ग्रामीणों द्वारा सरपंच पति बताया जा रहा है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।


मामले को लेकर ग्रामीणों ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और जिला कलेक्टर से शिकायत कर जांच एवं कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन शासकीय कार्यों के लिए निर्धारित स्थान है, ऐसे में यदि वहां शराब का सेवन किया गया है तो मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

पंचायत भवन में शराबखोरी के आरोप से बढ़ा विवाद


वायरल वीडियो सामने आने के बाद मामला केवल कथित शराबखोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पंचायतों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति या अन्य परिजनों के सक्रिय होने को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। पंचायतों में महिला सरपंच, पंच, जनपद सदस्य, जनपद अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे पदों पर निर्वाचित होने के बावजूद कई स्थानों पर उनके प्रतिनिधियों द्वारा पंचायत के कामकाज में हस्तक्षेप किए जाने के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

कहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर कथित लेन-देन या वसूली से जुड़े ऑडियो सामने आने की बात कही जाती है, तो कहीं अधिकारी-कर्मचारियों से विवाद, दबाव बनाने अथवा मारपीट जैसे आरोप चर्चा में रहते हैं। ऐसे मामलों में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है और निर्वाचित प्रतिनिधि की भूमिका कितनी स्वतंत्र है, यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य पर सवाल

महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में आगे लाने के उद्देश्य से पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इसका मूल उद्देश्य महिलाओं को नेतृत्व का अवसर देना और उन्हें अपने क्षेत्र के विकास से जुड़े निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने के लिए सक्षम बनाना है।

लेकिन जब निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की जगह उनके पति या अन्य परिजन पंचायत के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आते हैं, तो महिला सशक्तिकरण की मूल भावना पर सवाल उठना स्वाभाविक है। निर्वाचित पद महिला के नाम पर हो और व्यवहारिक रूप से निर्णय कोई दूसरा व्यक्ति ले, तो यह व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

कोटिया का मामला फिर सामने लाया बड़ा सवाल

ग्राम पंचायत कोटिया का वायरल वीडियो इसी बड़े सवाल को एक बार फिर सामने ला रहा है। पंचायत भवन जैसी शासकीय जगह पर कथित शराब सेवन का वीडियो और उसके बाद ग्रामीणों की शिकायत ने प्रशासन के सामने जांच की जिम्मेदारी रख दी है।

अब जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। वीडियो की सत्यता, उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान और पंचायत भवन में शराब सेवन की परिस्थितियों की जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

‘प्रतिनिधि राज’ पर स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत

पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति या अन्य परिजनों के अनधिकृत हस्तक्षेप को लेकर सरकार और पंचायत विभाग को भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार करना चाहिए। महिला जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों और कर्मचारियों से सीधे संवाद करने, बैठकों में स्वयं भाग लेने तथा पंचायत के निर्णयों में अपनी स्वतंत्र भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

महिला सशक्तिकरण सिर्फ आरक्षण देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होगा, जब निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्वयं निर्णय लें, प्रशासन के साथ सीधे संवाद करें और पंचायत की जिम्मेदारियों का निर्वहन अपने अधिकारों के साथ स्वतंत्र रूप से करें।

कोटिया का मामला अब इसी बड़े सवाल को सामने ला रहा है—क्या पंचायतों में ‘प्रतिनिधि राज’ की जगह निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को वास्तविक अधिकार और स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर मिलेगा? प्रशासनिक जांच और कार्रवाई से ही इस मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।