गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमत और आपूर्ति संकट पर सरकार घिरी : जीवराखन साहू जिलाध्यक्ष असंगठित कांग्रेस मजबूर समस्या निवारण क्षेत्र जिला बालोद पूर्व महामंत्री ब्लॉक कांग्रेस कामेटी

(दीपक देवदास)

गुरुर। प्रदेश में रसोई गैस की आपूर्ति में आ रही बाधा और सिलेंडर के दामों में लगातार बढ़ोतरी को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता जीवराखन साहू ने केंद्र एवं राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीते एक सप्ताह से घरेलू गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

श्री साहू ने कहा कि कई स्थानों पर गैस एजेंसियों के सामने सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे घरों में रसोई व्यवस्था प्रभावित हो रही है और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर भाजपा सरकार गैस सिलेंडर के दामों में लगातार बढ़ोतरी कर आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है, वहीं दूसरी ओर गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी विफल साबित हो रही है। हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये तथा कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे पहले से महंगाई से जूझ रही जनता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

जीवराखन साहू ने कहा कि गैस बुकिंग की व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमरा गई है। कई जगह उपभोक्ताओं को बुकिंग नंबर बंद होने या सर्वर डाउन रहने की शिकायतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे सिलेंडर बुक कराने में भी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले जहां गैस सिलेंडर की अगली बुकिंग के लिए 21 दिनों का अंतराल निर्धारित था, अब इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, जो यह दर्शाता है कि प्रदेश में गैस की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था में गंभीर समस्या बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार विकास और राहत के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर आम जनता को महंगाई और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर की लगातार बढ़ती कीमतें और अब उसकी कमी गरीब तथा मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है।

अंत में श्री साहू ने सरकार से मांग की कि रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था को तुरंत सुधारते हुए कीमतों पर नियंत्रण किया जाए, ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।






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