विधि विधान से ग्राम परसापाली में मनाया गया भोजली पर्व, 19 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, पूर्णिमा साहू हुई पुरूस्कृत

(रौनक साहू)

कसडोल। जिले के परसापाली गांव में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा और भाईचारे का पर्व भोजली धूमधाम से मनाया गया। जय भोले समिति द्वारा आयोजित भोजली प्रतियोगिता में गांव के 19 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग रूप में सजाई गई भोजली और आकर्षक स्लोगन लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। प्रतियोगिता के बाद महानदी में भोजली का विसर्जन किया गया। उल्लेखनीय है कि तस्वीरों में नजर आ रहा यह नजारा है बलौदाबाजार जिले के परसापाली गांव का, जहां भोजली पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। हर साल की तरह इस बार भी जय भोले समिति द्वारा भव्य भोजली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में गांव के 19 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने भोजली को आकर्षक ढंग से सजाकर उसमें अलग-अलग तरह के स्लोगन और संदेश लगाए। इस दौरान पारंपरिक लोक संस्कृति के साथ रचनात्मकता की भी झलक देखने को मिली।


“निर्णायक समिति ने दिया पुरस्कार”

प्रतियोगिता के लिए बाकायदा निर्णायक समिति बनाई गई थी। निर्णायकों के निर्णय के आधार पर प्रथम पुरस्कार के रूप में पूर्णिमा समूह को 5701 रुपये प्रदान किए गए। वही इस कार्यक्रम में कसडोल विधानसभा क्षेत्र के विधायक संदीप साहू भी शामिल हुए। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों और आयोजन समिति ने उनका भव्य स्वागत किया। मंच से विधायक ने जय भोले समिति को प्रोत्साहन राशि प्रदान की और भोजली जैसी पारंपरिक लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए आयोजन समिति और युवाओं की सराहना की।


“विधायक ने दी सोलर लाइट की सौगात”

वहीं ग्रामीणों ने विधायक के सामने गांव के चौक-चौराहों पर सोलर लाइट लगाने की मांग रखी। ग्रामीणों की मांग पर विधायक संदीप साहू ने जल्द ही चिन्हित स्थानों पर सोलर लाइट लगाने की घोषणा की। दिनभर चले आयोजन के बाद शाम को भोजली प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागी और ग्रामीण महानदी पहुंचे, जहां विधि-विधान के साथ भोजली का विसर्जन किया गया। इस दौरान आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। भोजली विसर्जन के बाद लोगों ने एक-दूसरे के कान में भोजली खोंचकर भाईचारे और आपसी प्रेम का संदेश दिया और पर्व की बधाई दी। आपको बता दे कि भोजली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और भाईचारे की पहचान है। परसापाली में आयोजित यह प्रतियोगिता नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन परंपराओं से जोड़ने की एक खूबसूरत पहल भी नजर आई।

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