चिकित्सक से मिल दलालों ने किया मासूम के मौत का सौदा

(राकेश चंद्रा)


प्रदेश सरकार कि न्याय-व्यवस्था व नीतियों पर सवाल खडा़ कर, मृतक के परिजन को दलालों ने किया गुमराह-

सोशल मीडिया में भी मामले ने पकड़ा तूल-

अनूपपुर। गत 04 अगस्त रविवार कि सुबह ग्राम बहेराबांध निवासी दयाराम उर्फ बबलू दिवान द्वारा अपनी 04 वर्षीय पुत्री का उपचार कराने बिजुरी में संचालित निजी क्लीनिक पहुंचा गया। जहां क्लीनिक संचालक के प्रशिक्षु पुत्र द्वारा लापरवाही बरतते हुए, उक्त बच्ची का बिना जांच किए ही उसके पिता को सिरप देकर माशूम को पिलाने के लिए कहा गया। जहां सिरप पीते ही क्लीनिक के भीतर उक्त 04 वर्षीय दिव्यांशी कि मौत हो गयी। मौत के कारण क्लीनिक कि बदनामी ना हो लिहाजा क्लीनिक संचालक द्वारा बेशर्मी कि हदें पार कर, मृतक के पिता को घण्टों क्लीनिक में बैठाकर रखा गया। अंततः कयी घण्टो बाद क्लीनिक संचालक द्वारा मृतक के पिता को शासकीय अस्पताल बिजुरी जाने दिया गया। जहां शासकीय अस्पताल में जांच उपरान्त ज्ञात हुआ कि माशूम कि मौत कयी घण्टे पूर्व ही हो चुकी है।

क्लीनिक संचालक ने बदनामी के भय से मानवता को किया शर्मशार…

नगर बिजुरी में संचालित पाल क्लीनिक के संचालक आशीष पाल एवं उनके पुत्र के भीतर कि इंसानियत किस कदर मर चुकी है इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि, उनके प्रशिक्षु पुत्र के लापरवाही के परिणामस्वरूप एक माशूम को अपनी जान कि कीमत देकर चुकानी पड़ी। बावजूद इसके पिता पुत्र को इस बात का तनिक भी पछतावा नही रहा। उन्हे केवल इस बात कि चिंता थी कि क्लीनिक में उपस्थित अन्य मरीजों को अगर यह ज्ञात हो गया कि उनके पुत्र कि अनभिज्ञता ने मासूम को काल के गाल में समाहित कर दिया। तो मरीज उनके क्लीनिक में आना बंद करने लगेंगे। लिहाजा मानवता को शर्मशार करने वाला कदम उठाते हुए पिता पुत्र ने मृतक एवं उसके परिजनों को बेवजह क्लीनिक में घण्टों तक बैठाकर रखा गया। क्लीनिक संचालक द्वारा अगर अपनी झूठी शान को बगल में रखकर, जरा भी मानवता दिखाया गया होता तो समय पर मरीज के परिजन किसी अन्य अस्पताल में मासूम का उपचार भी करा सकते थे। जिससे उसकी जान सम्भवतः बचाई भी जा सकती थी। किन्तु दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है, कि गरीब आदिवासी बच्ची कि जान क्लीनिक संचालक के झूठी शान के आगे दम तोड़ गयी।

शासकीय अस्पताल के चिकित्सक ने भी क्लीनिक संचालक के कारनामों में दिया साथ-

जिस समय मृतक के परिजन शासकीय अस्पताल बिजुरी पहुंचे, उस दौरान रोते-बिलखते मृतक के परिजनों द्वारा अस्पताल में घटना कि सारी आपबीती सुनाई गयी किन्तु। शासकीय अस्पताल के चिकित्सक ने क्लीनिक संचालक के कारनामों पर पर्दा डालते हुए, मामले कि सूचना ना तो स्थानीय बिजुरी पुलिस को दी गयी। और ना ही मृतक का पोस्टमार्टम करना आवश्यक समझा। जिससे इनकी कर्तव्य निष्ठा पर भी गम्भीर सवाल खड़ा होता है। चिकित्सक के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये से हताश परिजन बिना पोस्टमार्टम के ही बैरंग वापस लौट गए और विवशता पूर्वक मृतक का अंतिम संस्कार करने पर बाध्य हुए।

क्लीनिक संचालक से सांठ-गांठ कर दलालों ने भी मामले को दबाने में निभाई भूमिका-

माशूम दिव्यांशी के मौत को लगभग माह भर बीतने को आया। किन्तु मामले पर शिकायत व जांच कहीं भी किसी भी स्तर पर शासन-प्रशासन कि तरफ से अब तक नही किया जा रहा है, जिसकी मुख्य वजह चंद दलालों के क्रियाक्लापों को माना जा रहा है। कारण मृतक के परिजन न्याय कि आस में जब अपने घरौंदे से बाहर निकले उसी दौरान थानाक्षेत्र के सक्रिय दलालों ने योजनाबद्ध तरीकों से मृतक के परिजन को झांसा देते हुए, भाजपा शासित प्रदेश सरकार कि ढुलमुल न्याय-व्यवस्था व नीतियों का हवाला देकर अपनी चिकनी-चुपडी़ बातों से उन्हे गुमराह कर दिया गया। वहीं मामले पर जोर लाने के लिए स्थानीय दलालों ने जिला मुख्यालय से भी दो दलालों को बिजुरी बुलाया। और मृतक के परिजन को घटना स्थल पर ले जाकर क्लीनक संचालक से 04 वर्षीय माशूम के मौत का सौदाबाजी कर, उसके जान के एवज में मोटी रकम वसूलते हुए आपस में बंदरबाट कर लिए। जिसकी चर्चा लोगों के बीच इन दिनों नगर भर में व्याप्त है।

घटना के 25 दिन बाद सोशल मीडिया में मामले ने पकडा़ तूल…

घटना को लगभग माह भर होने को आयी, अब जाकर मामले कि जानकारी लोगों को जब लगी है तो लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह का पोष्ट कर उक्त बच्ची के लिए इंसाफ कि मांग कर रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया में लोग अपनी आक्रोश व्यक्त करते हुए उन दलालों का भी नाम पूंछ रहे हैं जिन्होने चंद पैसों के एवज में मासूम कि मौत का सौदा कर दिया।

ईनका कहना है…

इस मामले के संदर्भ में कयी लोगों का फोन आया है, मामला मेरे संज्ञान में है। सोमवार-मंगलवार तक टीम हमारे द्वारा उस क्लीनिक में भेजी जाएगी। और जांचकर उचित कार्यवाही की जाएगी।

ए.के.अवधिया

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

अनूपपुर

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