कसडोल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव एवं पथसंचलन संपन्न

शस्त्र पूजन के साथ राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता का दिया संदेश, संघ के 100 वर्ष की यात्रा पर वक्ताओं ने रखे विचार

कसडोल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खंड कसडोल द्वारा विजयादशमी उत्सव एवं पथसंचलन का आयोजन नगर के नगर भवन में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एनएमएस संजीवनी हॉस्पिटल के नेत्र सर्जन डॉ. विकास मिश्रा उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद के मध्य क्षेत्र मठ-मंदिर प्रमुख श्री चंद्रशेखर वर्मा ने संबोधित किया। आयोजन में स्वयंसेवकों ने अनुशासन, एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।

विजयादशमी उत्सव के अवसर पर स्वयंसेवकों द्वारा नगर में पथसंचलन निकाला गया। पथसंचलन नगर के प्रमुख मार्ग से होते हुए बजरंग चौक, बैगापारा एवं बगदेवी पारा पहुंचा। इसके बाद पुनः मुख्य मार्ग से होते हुए स्वयंसेवक नगर भवन मैदान पहुंचे, जहां मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शस्त्र पूजन तथा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।

युवा शक्ति राष्ट्र की प्रगति का आधार : डॉ. विकास मिश्रा

मुख्य अतिथि डॉ. विकास मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि युवा भारत के प्राण हैं। युवाओं की शक्ति, ऊर्जा और सकारात्मक सोच से ही देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ अराजक एवं देशविरोधी तत्व युवाओं को दिग्भ्रमित कर समाज और देश में अशांति पैदा करने का प्रयास करते हैं। ऐसे समय में युवाओं को जागरूक रहकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसा मंच है, जहां राष्ट्र के प्रति निष्ठा, समर्पण और सेवा भाव को महत्व दिया जाता है। राष्ट्र के प्रति लगाव के साथ नागरिकों को अपने मूल अधिकारों के साथ मूल कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ से जुड़कर युवा राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। संघ की 100 वर्षों की यात्रा में संगठन ने देश और समाज के लिए अनेक कार्य किए हैं।

हिंदू समाज को संगठित कर भारत को परम वैभव तक पहुंचाना संघ का लक्ष्य : चंद्रशेखर वर्मा

मुख्य वक्ता श्री चंद्रशेखर वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू समाज का ऐसा संगठन है, जो भारत के हित और हिंदू समाज के उत्थान की बात करता है। संघ ने अपनी 100 वर्षों की यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन भारत माता को परम वैभव के शिखर तक पहुंचाने का लक्ष्य सदैव सर्वोपरि रहा है। इसी ध्येय को लेकर संघ ने अपनी शताब्दी यात्रा पूर्ण की है।

उन्होंने कहा कि भारत की भूमि पवित्र है, जहां सनातन संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण होता आया है। सनातन समाज ने सदैव संपूर्ण विश्व को मार्गदर्शन देने का कार्य किया है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना ही विश्व में शांति और सद्भाव स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

 

श्री वर्मा ने कहा कि स्वयंसेवकों ने अपने सेवा कार्यों और सामाजिक योगदान के माध्यम से अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं, जिनसे समाज को सकारात्मक दिशा और प्रेरणा मिली है। राष्ट्र के प्रति समर्पण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण ही समाज को सशक्त बनाने का आधार है।

 

कसडोल खण्ड कार्यवाह राजेंद्र कुमार निराला ने बताया की कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सामाजिक समरसता तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया गया। विजयादशमी उत्सव एवं पथसंचलन ने स्वयंसेवकों में संगठनात्मक एकता और राष्ट्रसेवा के भाव को अभिव्यक्त किया। अन्त में सफल आयोजन हेतु सभी का आभार व्यक्त किया गया।

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