जनपद CEO के आदेश को ठेंगा दिखा रहे रमतला के सरपंच-सचिव, 24 घंटे का अल्टीमेटम भी बेअसर
बिलाईगढ़। जनपद पंचायत बिलाइगढ़ के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रमतला का एक नया कारनामा सामने आया है, जहां वर्तमान सरपंच और सचिव द्वारा शासकीय आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत बिलाइगढ़ द्वारा जारी कड़े निर्देश और 24 घंटे की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी पीड़ित पूर्व सरपंच को उनके हक की राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत रमतला के पूर्व सरपंच ईश्वर भारती द्वारा प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत पंचायत में विभिन्न विकास कार्य कराए गए थे। इन कार्यों की अंतिम किस्त की राशि कुल 6,74,863.00 रुपये जनपद कार्यालय द्वारा दिनांक 27 अप्रैल 2026 को ही ग्राम पंचायत रमतला के भारतीय स्टेट बैंक शाखा बिलाइगढ़ के खाता क्रमांक 3227298725 में जमा करा दी गई थी। नियमतः इस राशि का भुगतान तत्काल कार्य कराने वाले पूर्व सरपंच को हो जाना चाहिए था, लेकिन वर्तमान सरपंच और सचिव ने द्वेषपूर्ण या अन्य अज्ञात कारणों से इस राशि को दबाकर रख लिया।
*CEO ने थमाया था नोटिस* , कार्रवाई की चेतावनी भी बेअसर
मामला संज्ञान में आने पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने पत्र क्रमांक6504/PMAGY/ज.पं./2026 दिनांक 25/09/2026 को एक अत्यंत सख्त आदेश जारी किया था। आदेश में स्पष्ट लिखा था कि पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर पूर्व सरपंच को नियमानुसार राशि का भुगतान कर पावती कार्यालय में प्रस्तुत करें। CEO ने चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर उनके खिलाफ जिला कार्यालय को दंडात्मक व वैधानिक कार्रवाई हेतु पत्र लिखा जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरपंच-सचिव की होगी।
*क्या है पूरा घपला?*
मामले के अनुसार, पूर्व सरपंच ईश्वर भारती द्वारा जब उक्त खाते का जाँच कराया तो पंचायत खाते से राशि गायब थी नियमानुसार यह राशि सीधे संबंधित वेंडर या कार्य कराने वाले को मिलनी थी। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी और बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्तमान सरपंच और सचिव ने मिलीभगत कर करीब 4 महीने पहले ही इस पूरी राशि को शासकीय खाते से आहरित कर लिया गया । जिसकी शिकायत पूर्व सरपंच द्वारा कलेक्टर जनदर्शन में भी किया गया था |
*प्रशासनिक मौन पर उठ रहे सवाल*
हैरानी की बात यह है कि जनपद CEO द्वारा दिए गए अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होने के 25 दिन बाद भी वर्तमान सरपंच और सचिव पर कोई असर नहीं हुआ है। पीड़ित पूर्व सरपंच अपनी ही मेहनत की राशि पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि जनपद और जिला प्रशासन इन बेलगाम पंचायत प्रतिनिधियों पर कब और क्या ठोस कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

